सिंगल माँ का बदला

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अध्याय 310

कमरा धुंधला-सा था। फर्श पर एक आदमी का गाउन और एक औरत की नाइटगाउन उलझे हुए पड़े थे।

जलती हुई त्वचा, जलती हुई त्वचा से चिपकी थी। उंगलियाँ आपस में गुँथी थीं। चुम्बन तेज़, बेचैन और तपते जा रहे थे।

“रुको…”

लिस्बेथ की पीठ मुलायम बिस्तर में धँस गई। उसके ऊपर एक गरम सी छाती। चुम्बनों की बरसात ने उसकी साँस...

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